Posts

एक अम्प्यूटी का जीवन: निर्भरता से आत्मनिर्भरता तक – एक प्रोस्थेटिस्ट का दृष्टिकोण - by Foot Care Jaipur (Artificial Limb Clinic Since 1998)

Image
  एक अम्प्यूटी का जीवन: निर्भरता से आत्मनिर्भरता तक – एक प्रोस्थेटिस्ट का दृष्टिकोण लेखक: Dr Rajiv Agrawal , Prosthetist & Orthotist Clinical Director (Prosthetics & Orthotics),  Foot Care Jaipur  (Artificial Limb Clinic Since 1998) अम्प्यूटेशन (अंग विच्छेदन) किसी भी व्यक्ति के जीवन में शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक, सामाजिक और व्यावसायिक स्तर पर भी एक बड़ा बदलाव लेकर आता है। लेकिन यह बदलाव अंत नहीं , बल्कि सही मार्गदर्शन और वैज्ञानिक प्रोस्थेटिक रिहैबिलिटेशन के साथ एक नई, आत्मनिर्भर शुरुआत बन सकता है। एक प्रोस्थेटिस्ट के रूप में मेरा अनुभव स्पष्ट रूप से बताता है कि अम्प्यूटी का जीवन कितना सफल, स्वतंत्र और कार्यक्षम होगा—यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि रिहैबिलिटेशन की प्रक्रिया कितनी सही, व्यवस्थित और प्रोफेशनल तरीके से अपनाई गई है। अम्प्यूटी का जीवन सफल क्या बनाता है? 1️⃣ योग्य और अनुभवी प्रोस्थेटिस्ट की देखरेख प्रोस्थेटिक रिहैबिलिटेशन कोई रेडीमेड समाधान नहीं है। Qualified & Experienced Prosthetist द्वारा तय किए गए स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल , सह...

ऑटिज़्म से ग्रसित बच्चों के लक्षण, कारण और ऑर्थोटिक्स की महत्वपूर्ण भूमिका by Foot Care Jaipur (Artificial Limb Clinic Since 1998)

Image
  ऑटिज़्म से ग्रसित बच्चों के लक्षण, कारण और ऑर्थोटिक्स की महत्वपूर्ण भूमिका आज के समय में “ऑटिज़्म” (Autism Spectrum Disorder – ASD) को लेकर जागरूकता बढ़ी है, लेकिन फिर भी बहुत-से माता-पिता इसके शुरुआती लक्षणों को पहचान नहीं पाते। समय पर पहचान और सही रिहैबिलिटेशन सपोर्ट बच्चे के भविष्य को बेहतर बना सकता है। यह लेख ऑटिज़्म से जुड़े प्रमुख लक्षणों, संभावित कारणों, पारिवारिक सावधानियों तथा ऑर्थोटिस्ट और ऑर्थोटिक्स की भूमिका को सरल भाषा में समझाने का प्रयास है। ऑटिज़्म क्या है? ऑटिज़्म एक न्यूरो-डेवलपमेंटल कंडीशन है, जिसमें बच्चे के व्यवहार, सामाजिक संपर्क, संचार क्षमता और मूवमेंट पर प्रभाव पड़ता है। यह कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक स्पेक्ट्रम है – यानी हर बच्चा अलग तरह से प्रभावित होता है। ऑटिज़्म से ग्रसित बच्चों के सामान्य लक्षण 1. सामाजिक और व्यवहारिक लक्षण आँखों में आँख डालकर बात न करना नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया न देना अकेले रहना पसंद करना भावनाओं को समझने या व्यक्त करने में कठिनाई एक ही गतिविधि को बार-बार दोहराना (Repetitive Behavior) 2. संचार (Communi...

सेरेब्रल पाल्सी से ग्रसित बच्चों में ऑर्थोटिक्स की भूमिका - By Foot Care Jaipur (Artificial Limb Clinic Since 1998)

Image
  सेरेब्रल पाल्सी से ग्रसित बच्चों में ऑर्थोटिक्स की भूमिका एक बेहतर, आसान और आत्मनिर्भर जीवन की ओर लेखक: डॉ. राजीव अग्रवाल क्लिनिकल डायरेक्टर – प्रोस्थेटिक्स एंड ऑर्थोटिक्स Foot Care Jaipur (Artificial Limb Clinic Since 1998) सेरेब्रल पाल्सी (Cerebral Palsy) से पीड़ित बच्चों के साथ काम करते हुए मेरा वर्षों का अनुभव यही कहता है कि समय पर, सही तरीके से और नियमित रूप से उपयोग किए गए ऑर्थोटिक उपकरण न केवल बच्चे की वर्तमान समस्याओं को कम करते हैं, बल्कि भविष्य में होने वाली गंभीर जटिलताओं से भी बचाते हैं। सेरेब्रल पाल्सी एक ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चे की मांसपेशियों का संतुलन, गति, बैठने-खड़े होने की क्षमता और चलने का पैटर्न प्रभावित होता है। यदि इन समस्याओं को शुरुआती अवस्था में सही दिशा न दी जाए, तो आगे चलकर कॉन्ट्रैक्चर, जॉइंट स्टिफनेस, संतुलन की कमी और स्थायी विकलांगता विकसित हो सकती है। यहीं पर ऑर्थोटिक्स एक निर्णायक भूमिका निभाते हैं। सेरेब्रल पाल्सी में ऑर्थोटिक्स क्यों आवश्यक हैं? सेरेब्रल पाल्सी में मांसपेशियां अक्सर या तो बहुत ज्यादा टाइट (Spastic) होती हैं या...

पिजन चेस्ट (Pectus Carinatum): ऑर्थोटिस्ट की दृष्टि से by Foot Care Jaipur (Artificial Limb Clinic Since 1998)

Image
  पिजन चेस्ट (Pectus Carinatum): ऑर्थोटिस्ट की दृष्टि से लेखक: डॉ. राजीव अग्रवाल, P&O Clinical Director – Prosthetics & Orthotics Foot Care Jaipur (Artificial Limb Clinic Since 1998) शुरुआती लक्षण – जिन्हें परिवार आसानी से पहचान सकता है पिजन चेस्ट एक छाती की विकृति है, जिसमें छाती की हड्डी आगे की ओर उभरी हुई दिखाई देती है। इसके शुरुआती संकेत अक्सर बचपन या किशोरावस्था में दिखते हैं: छाती का आगे की ओर निकलना (पक्षी के सीने जैसा) कपड़े पहनने पर छाती का असामान्य उभार साफ दिखना खेलकूद या दौड़ने पर थकान या सांस फूलना बच्चे का आत्मविश्वास कम होना या सामाजिक झिझक माता-पिता को “धीरे-धीरे बढ़ती विकृति” का एहसास होना समय रहते पहचान न हो तो किशोरावस्था में यह विकृति तेजी से बढ़ सकती है। पिजन चेस्ट के कारण विकास के दौरान हड्डियों का असंतुलित बढ़ना आनुवंशिक कारण (परिवार में इतिहास) कनेक्टिव टिश्यू डिसऑर्डर तेज़ ग्रोथ स्पर्ट के समय कॉस्टल कार्टिलेज का अधिक विकास ग्रोथ रेट कैसे कम की जा सकती है? अर्ली डिटेक्शन और समय पर ऑर्थोटिक हस्तक्षेप ...