ऑटिज़्म से ग्रसित बच्चों के लक्षण, कारण और ऑर्थोटिक्स की महत्वपूर्ण भूमिका by Foot Care Jaipur (Artificial Limb Clinic Since 1998)








 

ऑटिज़्म से ग्रसित बच्चों के लक्षण, कारण और ऑर्थोटिक्स की महत्वपूर्ण भूमिका

आज के समय में “ऑटिज़्म” (Autism Spectrum Disorder – ASD) को लेकर जागरूकता बढ़ी है, लेकिन फिर भी बहुत-से माता-पिता इसके शुरुआती लक्षणों को पहचान नहीं पाते। समय पर पहचान और सही रिहैबिलिटेशन सपोर्ट बच्चे के भविष्य को बेहतर बना सकता है।

यह लेख ऑटिज़्म से जुड़े प्रमुख लक्षणों, संभावित कारणों, पारिवारिक सावधानियों तथा ऑर्थोटिस्ट और ऑर्थोटिक्स की भूमिका को सरल भाषा में समझाने का प्रयास है।


ऑटिज़्म क्या है?

ऑटिज़्म एक न्यूरो-डेवलपमेंटल कंडीशन है, जिसमें बच्चे के व्यवहार, सामाजिक संपर्क, संचार क्षमता और मूवमेंट पर प्रभाव पड़ता है। यह कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक स्पेक्ट्रम है – यानी हर बच्चा अलग तरह से प्रभावित होता है।


ऑटिज़्म से ग्रसित बच्चों के सामान्य लक्षण

1. सामाजिक और व्यवहारिक लक्षण

  • आँखों में आँख डालकर बात न करना

  • नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया न देना

  • अकेले रहना पसंद करना

  • भावनाओं को समझने या व्यक्त करने में कठिनाई

  • एक ही गतिविधि को बार-बार दोहराना (Repetitive Behavior)

2. संचार (Communication) से जुड़े लक्षण

  • बोलने में देरी या बिल्कुल न बोल पाना

  • शब्दों या वाक्यों को दोहराना (Echolalia)

  • इशारों या बॉडी लैंग्वेज का कम उपयोग

3. सेंसरी और मूवमेंट संबंधी लक्षण

  • संतुलन (Balance) में समस्या

  • चलने के तरीके में असामान्यता

  • पंजों के बल चलना (Toe Walking)

  • गिरने की अधिक संभावना

  • मांसपेशियों में जकड़न या ढीलापन

यहीं से ऑर्थोटिक्स और ऑर्थोटिस्ट की भूमिका शुरू होती है।


ऑटिज़्म के संभावित कारण

ऑटिज़्म का कोई एक कारण नहीं होता। शोध के अनुसार इसके पीछे कई फैक्टर हो सकते हैं:

  • जेनेटिक कारण

  • गर्भावस्था के दौरान जटिलताएँ

  • समय से पहले जन्म (Premature Birth)

  • न्यूरोलॉजिकल डेवलपमेंट में असंतुलन

महत्वपूर्ण बात यह है कि यह माता-पिता की किसी गलती के कारण नहीं होता


परिवार के सदस्यों को क्या सावधानियाँ रखनी चाहिए?

  • बच्चे की तुलना अन्य बच्चों से न करें

  • धैर्य और निरंतरता बनाए रखें

  • रोज़मर्रा की गतिविधियों (ADL – Activities of Daily Living) में बच्चे को शामिल करें

  • डॉक्टर,ऑर्थोटिस्ट और थैरेपिस्ट के बीच समन्वय बनाए रखें

  • समय-समय पर फॉलो-अप और असेसमेंट कराते रहें


ऑर्थोटिस्ट की भूमिका ऑटिज़्म प्रबंधन में

अक्सर ऑटिज़्म को केवल बिहेवियर या स्पीच थैरेपी से जोड़कर देखा जाता है, जबकि कई बच्चों में मूवमेंट, बैलेंस और पोस्चर की गंभीर समस्याएँ होती हैं।

एक Qualified & Experienced Orthotist निम्नलिखित में मदद करता है:

  • गेट (चलने के तरीके) का वैज्ञानिक मूल्यांकन

  • संतुलन सुधारने के लिए कस्टम ऑर्थोटिक्स

  • Toe Walking और Flat Foot जैसी समस्याओं का समाधान

  • मांसपेशियों और जोड़ों पर अनावश्यक दबाव को कम करना


ऑटिज़्म में ऑर्थोटिक्स का महत्व

सही समय पर डिज़ाइन किए गए कस्टम ऑर्थोटिक्स:

  • गिरने के जोखिम को कम करते हैं

  • भविष्य में होने वाली डिफॉर्मिटी से बचाते हैं

  • बच्चे को अधिक आत्मनिर्भर बनाते हैं

  • स्कूल और खेल गतिविधियों में भागीदारी बढ़ाते हैं

  • रोज़मर्रा की गतिविधियों (चलना, खड़ा होना, सीढ़ियाँ चढ़ना) को आसान बनाते हैं

यह केवल एक डिवाइस नहीं, बल्कि बच्चे के बेहतर भविष्य की नींव होती है।


क्यों ज़रूरी है योग्य और अनुभवी ऑर्थोटिस्ट?

हर ऑटिज़्म बच्चा अलग होता है। रेडी-मेड सोल्यूशन अक्सर नुकसान पहुँचा सकते हैं।
एक अनुभवी ऑर्थोटिस्ट:

  • बच्चे की उम्र, वजन, व्यवहार और सेंसरी इश्यू को समझता है

  • मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम के साथ काम करता है

  • नियमित फॉलो-अप और मॉडिफिकेशन करता है

यही अंतर होता है सिर्फ ऑर्थोटिक्स पहनने और सही ऑर्थोटिक मैनेजमेंट में।


निष्कर्ष

ऑटिज़्म को चुनौती नहीं, बल्कि समझ और सही मार्गदर्शन की आवश्यकता है। समय पर पहचान, परिवार का सहयोग और एक अनुभवी ऑर्थोटिस्ट की भूमिका मिलकर बच्चे को अधिक संतुलित, आत्मनिर्भर और सुरक्षित जीवन की ओर ले जा सकती है।

अगर आपके मन में ऑटिज़्म, बैलेंस, चलने की समस्या या ऑर्थोटिक्स को लेकर कोई सवाल है, तो नीचे कमेंट करें या विशेषज्ञ से परामर्श लें।


लेखक:
डॉ. राजीव अग्रवाल
Clinical Director (Prosthetics & Orthotics)
Foot Care Jaipur – Artificial Limb Clinic (Since 1998)


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अस्वीकरण:
इस लेख में दी गई जानकारी केवल स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता एवं शैक्षणिक उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। यह जानकारी सामान्य चिकित्सीय अनुभव, स्वीकृत वैज्ञानिक तथ्यों एवं उपलब्ध चिकित्सा साहित्य पर आधारित है।

यह लेख किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है प्रत्येक व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति एवं उपचार की आवश्यकता भिन्न हो सकती है।

पाठकों को यह सलाह दी जाती है कि वे इस लेख में दी गई जानकारी के आधार पर स्वयं कोई निदान या उपचार करें किसी भी प्रकार का उपचार, दवा, व्यायाम या चिकित्सीय निर्णय केवल योग्य एवं पंजीकृत चिकित्सक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ की प्रत्यक्ष देखरेख एवं मार्गदर्शन में ही करें

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