Amputee - Mental and Social Rehabilitation - From the Patient and Family Angle - Do's and Don'ts
प्रोस्थेसिस के साथ अम्प्यूटी का मानसिक एवं सामाजिक पुनर्वास
(मरीज के दृष्टिकोण से)
Amputation (अंग कटना) केवल शारीरिक बदलाव नहीं है, यह व्यक्ति के मन, आत्मविश्वास और सामाजिक जीवन को भी गहराई से प्रभावित करता है। सही प्रोस्थेसिस (कृत्रिम अंग) के साथ-साथ मानसिक और सामाजिक पुनर्वास उतना ही आवश्यक है, जितना शारीरिक चलना-फिरना। जब यह पुनर्वास सही दिशा में होता है, तब व्यक्ति फिर से स्वतंत्र, आत्मनिर्भर और सक्रिय जीवन जी सकता है।
Amputation के बाद मानसिक चुनौतियाँ
अक्सर मरीज इन भावनाओं से गुजरता है:
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सदमा और अस्वीकार (Shock & Denial)
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डर – “अब जीवन कैसे चलेगा?”
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आत्मविश्वास में कमी
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सामाजिक दूरी और संकोच
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भविष्य को लेकर चिंता
यह सब सामान्य है। सही समय पर मार्गदर्शन और काउंसलिंग से इन भावनाओं को संभाला जा सकता है।
प्रोस्थेटिस्ट का दृष्टिकोण: मानसिक पुनर्वास क्यों ज़रूरी?
एक अनुभवी प्रोस्थेटिस्ट केवल प्रोस्थेसिस फिट नहीं करता, बल्कि मरीज को मानसिक रूप से भी तैयार करता है।
Dr Rajiv Agrawal,
Clinical Director (Prosthetics & Orthotics),
Foot Care Jaipur (Artificial Limb Clinic Since 1998)
अपने लगभग तीन दशकों के अनुभव में यह मानते हैं कि
“जब मरीज प्रोस्थेसिस को अपने शरीर का हिस्सा मानने लगता है, तभी असली रिहैबिलिटेशन शुरू होता है।”
मरीज का दृष्टिकोण: प्रोस्थेसिस के साथ जीवन
प्रोस्थेसिस के साथ जीवन सीखने की प्रक्रिया है:
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शुरुआत में असहजता और डर
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धीरे-धीरे संतुलन और नियंत्रण
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आत्मविश्वास का विकास
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रोज़मर्रा के कामों में सहजता
सही प्रशिक्षण और धैर्य से यह यात्रा आसान बनती है।
परिवार की भूमिका: सबसे मजबूत सहारा
परिवार का ज्ञान और व्यवहार पुनर्वास की गति तय करता है:
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ज़रूरत से ज़्यादा सहानुभूति नहीं, सकारात्मक सहयोग
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मरीज को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करना
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प्रोस्थेसिस पहनने, उतारने और देखभाल में सहयोग
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नकारात्मक बातों और तुलना से बचना
प्रोस्थेसिस उपयोग में सावधानियाँ (Precautions)
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रोज़ stump (बचे अंग) की जांच
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किसी भी लालिमा, घाव या दर्द को नज़रअंदाज़ न करें
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प्रोस्थेसिस को सही तरीके से पहनना-उतारना
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गीले या पसीने वाले stump पर प्रोस्थेसिस न पहनें
जीवन को आरामदायक और प्रभावी बनाने के कदम
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सही socket design और फिट
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मरीज की जीवनशैली के अनुसार प्रोस्थेसिस चयन
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gait training और संतुलन अभ्यास
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सामाजिक गतिविधियों में धीरे-धीरे वापसी
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कार्यस्थल और घर में छोटे-छोटे बदलाव
यहीं पर योग्य, अनुभवी और विशेषज्ञ प्रोस्थेटिस्ट की भूमिका निर्णायक होती है।
क्यों अनुभव और विशेषज्ञता मायने रखती है?
गलत फिटिंग या गलत सलाह से:
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दर्द और घाव
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चलने का गलत पैटर्न
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मानसिक निराशा
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सामाजिक दूरी
जबकि सही मूल्यांकन, सही प्रिस्क्रिप्शन और सही प्रशिक्षण से व्यक्ति आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनता है—यही दर्शन Foot Care Jaipur में अपनाया जाता है।
निष्कर्ष
प्रोस्थेसिस केवल एक उपकरण नहीं, बल्कि नए जीवन की कुंजी है। मानसिक मजबूती, सामाजिक स्वीकार्यता, परिवार का सहयोग और एक अनुभवी प्रोस्थेटिस्ट का मार्गदर्शन—इन चारों से मिलकर अम्प्यूटी व्यक्ति फिर से सम्मानजनक और सक्रिय जीवन जी सकता है।

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