Awareness & Rights of Amputees - An Amputee and Family should know by Foot Care Jaipur
अम्प्यूटी जागरूकता एवं अधिकार (Awareness & Rights of Amputees)
अंग विच्छेदन (Amputation) के बाद जीवन समाप्त नहीं होता—सही जानकारी, अधिकारों की समझ और उचित पुनर्वास से जीवन फिर से आत्मनिर्भर बन सकता है। इस लेख का उद्देश्य अम्प्यूटी व्यक्ति और उनके परिवार को उनके कानूनी अधिकारों, सरकारी योजनाओं और सुविधाओं के बारे में सरल भाषा में जागरूक करना है।
1. दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार (RPwD Act, 2016)
भारत में Rights of Persons with Disabilities Act, 2016 के अंतर्गत अम्प्यूटी व्यक्ति को समान अवसर, सम्मान और भेदभाव-मुक्त जीवन का अधिकार है।
-
शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार में समान अवसर
-
सार्वजनिक स्थानों पर Accessibility (रैम्प, लिफ्ट, शौचालय)
-
सरकारी योजनाओं में प्राथमिकता
2. सरकारी योजनाएँ एवं लाभ
अम्प्यूटी व्यक्तियों के लिए केंद्र व राज्य सरकारें कई योजनाएँ चलाती हैं, जैसे—
-
UDID कार्ड (Unique Disability ID)
-
कृत्रिम अंग/सहायक उपकरण हेतु
-
पेंशन, यात्रा रियायतें, कर लाभ
इन योजनाओं का लाभ तभी मिलता है जब सही दस्तावेज और मार्गदर्शन उपलब्ध हो।
3. डिसेबिलिटी सर्टिफिकेट का महत्व
दिव्यांग प्रमाण पत्र (Disability Certificate) सरकारी लाभ, नौकरी में आरक्षण, टैक्स छूट और बीमा दावों के लिए अत्यंत आवश्यक है। समय पर और सही प्रतिशत के साथ प्रमाणन भविष्य की राह आसान बनाता है।
4. बीमा और रीइम्बर्समेंट की जानकारी
कई हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में Amputation, Prosthesis, Rehabilitation का कवरेज होता है।
-
पॉलिसी की शर्तें समझें
-
अस्पताल/क्लिनिक के बिल और रिपोर्ट सुरक्षित रखें
-
सही मार्गदर्शन से reimbursement संभव है
5. रोजगार एवं कार्यस्थल अधिकार
अम्प्यूटी व्यक्ति कार्य करने में सक्षम होते हैं। कानून के अनुसार—
-
योग्य उम्मीदवार को अवसर देना नियोक्ता की जिम्मेदारी है
-
कार्यस्थल पर आवश्यक reasonable space उपलब्ध कराना अनिवार्य है
6. सही पुनर्वास और विशेषज्ञ की भूमिका
सफल पुनर्वास के लिए योग्य, अनुभवी Prosthetist & Orthotist का मार्गदर्शन बेहद जरूरी है।
Dr. Rajiv Agrawal, Clinical Director (Prosthetics & Orthotics), Foot Care Jaipur (Artificial Limb Clinic Since 1998) पिछले कई दशकों से दिव्यांग एवं शारीरिक रूप से चुनौतीग्रस्त लोगों के कल्याण, पुनर्वास और आत्मनिर्भरता हेतु समर्पित हैं। सही प्रोस्थेसिस चयन, गेट ट्रेनिंग और फॉलो-अप से जीवन की गुणवत्ता बेहतर होती है।
निष्कर्ष
जागरूकता ही सशक्तिकरण है। अपने अधिकारों को जानें, सरकारी योजनाओं का लाभ लें, और सही विशेषज्ञ के साथ मिलकर आत्मनिर्भर जीवन की ओर कदम बढ़ाएँ।

Comments
Post a Comment