Role of Orthotics / Orthotist in treatment of Stroke Patients

स्ट्रोक रोगियों में ऑर्थोटिक्स की भूमिका


 







स्ट्रोक (Brain Stroke) के बाद रोगी के शरीर में चलने-फिरने, संतुलन, मांसपेशियों की ताकत और समन्वय से जुड़ी कई समस्याएँ उत्पन्न हो जाती हैं। एक ऑर्थोटिस्ट के रूप में मेरा अनुभव बताता है कि सही समय पर, सही ऑर्थोटिक प्रिस्क्रिप्शन और उसका प्रोटोकॉल के अनुसार उपयोग रोगी को दोबारा आत्मनिर्भर बनाने में निर्णायक भूमिका निभाता है।

Dr Rajiv Agrawal, Clinical Director (Prosthetics & Orthotics) Foot Care Jaipur (Artificial Limb Clinic Since 1998) बताते हैं की, पिछले कई वर्षों से स्ट्रोक रोगियों के साथ काम करते हुए यह स्पष्ट देख रहा हूँ कि ऑर्थोटिक्स केवल “सपोर्ट” नहीं, बल्कि री-लर्निंग ऑफ मूवमेंट का एक वैज्ञानिक माध्यम है।


स्ट्रोक के बाद होने वाली पाल्सी (Palsy) – नामकरण व समझ

स्ट्रोक के प्रकार और मस्तिष्क के प्रभावित भाग के अनुसार अलग-अलग पाल्सी देखी जाती हैं:

हेमीप्लीजिया (Hemiplegia)

  • शरीर के एक ही तरफ (दायाँ या बायाँ) हाथ-पैर प्रभावित

  • सबसे आम स्ट्रोक-संबंधित स्थिति

  • समस्याएँ:

    • फुट ड्रॉप

    • घुटने का अस्थिर होना

    • हाथ की स्पैस्टिसिटी

हेमिपेरेसिस (Hemiparesis)

  • पूर्ण लकवा नहीं, लेकिन कमजोरी

  • समस्या: गलत चाल (Abnormal Gait Pattern)

डिप्लीजिया / पैराप्लीजिया (कम मामलों में)

  • दोनों निचले अंग प्रभावित

  • चलने के लिए विशेष ऑर्थोसिस की आवश्यकता


अलग-अलग स्तरों पर रोगी को आने वाली समस्याएँ

एंकल व फुट स्तर

  • Foot Drop

  • Heel Strike का अभाव
    समाधान: Custom Orthotics as Prescribed by Orthotist

घुटना स्तर

  • Knee Buckling

  • Hyperextension
    समाधान: Custom Orthotics as Prescribed by Orthotist

पूरी चाल (Gait) स्तर

  • असंतुलन

  • गिरने का डर
    समाधान: Custom Orthotics as Prescribed by Orthotist


ऑर्थोटिक्स का प्रभाव – केवल सहारा नहीं, पुनर्वास का आधार

ऑर्थोटिक्स का उद्देश्य है:

  • सही जॉइंट अलाइनमेंट

  • मांसपेशियों को सही दिशा में ट्रेन करना

  • गलत मूवमेंट पैटर्न को रोकना

 महत्वपूर्ण बात:

गलत ऑर्थोटिक या बिना प्रोटोकॉल उपयोग से रोगी गलत चाल सीख सकता है, जिसे बाद में सुधारना बहुत कठिन हो जाता है।


सही ऑर्थोटिक प्रिस्क्रिप्शन क्यों ज़रूरी है?

एक अनुभवी ऑर्थोटिस्ट:

  • मसल टोन

  • स्पैस्टिसिटी

  • मोटर रिकवरी स्टेज

  • फंक्शनल गोल

इन सबका मूल्यांकन करके ही ऑर्थोसिस निर्धारित करता है।

Foot Care Jaipur में हर ऑर्थोसिस:

  • कस्टम मोल्डेड

  • ट्रायल व अडजस्टमेंट के बाद


ऑर्थोटिक्स + एक्सरसाइज़ = सफल पुनर्वास

ऑर्थोसिस अधिक प्रभावी होता है जब:

  • नियमित Exercises

  • स्ट्रेचिंग

  • बैलेंस ट्रेनिंग

  • और ऑर्थोटिस्ट की सलाह अनुसार पहनने का समय
    सख्ती से पालन किया जाए।


परिवार की भूमिका

  • धैर्य और निरंतर प्रेरणा

  • ओवर-डिपेंडेंसी से बचाव

  • सही समय पर फॉलो-अप


निष्कर्ष (Orthotist’s Message)

स्ट्रोक के बाद जीवन रुकता नहीं है।
सही ऑर्थोटिक सपोर्ट + वैज्ञानिक गेट ट्रेनिंग + नियमित अभ्यास
रोगी को दोबारा आत्मनिर्भर बना सकता है।

1998 से Foot Care Jaipur में हमारा उद्देश्य केवल डिवाइस देना नहीं, बल्कि
रोगी को चलना, जीना और आत्मविश्वास लौटाना है।


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अस्वीकरण:
इस लेख में दी गई जानकारी केवल स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता एवं शैक्षणिक उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। यह जानकारी सामान्य चिकित्सीय अनुभव, स्वीकृत वैज्ञानिक तथ्यों एवं उपलब्ध चिकित्सा साहित्य पर आधारित है।

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