Amputee Motivation - Self Confidence and Independence by Dr Rajiv Agrawal, Clinical Director (Prosthetics & Orthotics)






 

 अम्प्यूटी मोटिवेशन: आत्मविश्वास से आत्मनिर्भरता तक 

(एक प्रेरणादायक मार्गदर्शन – मरीज, परिवार और प्रोस्थेटिस्ट की साझा भूमिका)

अम्प्यूटेशन केवल शरीर के किसी हिस्से का नुकसान नहीं होता, यह व्यक्ति के मन, आत्मविश्वास और जीवन-दृष्टि की भी परीक्षा होती है। सही मार्गदर्शन, सकारात्मक सोच और वैज्ञानिक प्रोस्थेटिक रिहैबिलिटेशन से एक अम्प्यूटी न केवल सामान्य जीवन जी सकता है, बल्कि बेहतर प्रदर्शन और पूर्ण आत्मनिर्भरता भी प्राप्त कर सकता है।


 मानसिक शक्ति: सबसे पहला और सबसे ज़रूरी कदम

किसी भी कृत्रिम अंग (Artificial Limb) की सफलता की नींव माइंडसेट पर टिकी होती है।

  • “मैं कर सकता हूँ” की सोच

  • डर और हीनभावना से बाहर निकलना

  • प्रोस्थेसिस को बोझ नहीं, एक अवसर की तरह स्वीकार करना

 याद रखें: प्रोस्थेसिस शरीर को चलाता है, लेकिन जीवन को आगे बढ़ाता है आपका मन।


 परिवार की भूमिका: सहारा बने, सीमा नहीं

परिवार अम्प्यूटी के लिए सबसे बड़ी ताकत होता है, लेकिन:

  • अति-निर्भरता से बचें

  • सहानुभूति दें, दया नहीं

  • प्रयासों को सराहें, असफलता से डराएँ नहीं

  • रिहैबिलिटेशन और गेट ट्रेनिंग में सक्रिय सहयोग दें

सकारात्मक पारिवारिक वातावरण, रिहैबिलिटेशन की गति को कई गुना बढ़ा देता है।


 प्रोस्थेटिस्ट की भूमिका: सफलता का वैज्ञानिक आधार

एक योग्य और अनुभवी प्रोस्थेटिस्ट केवल कृत्रिम अंग नहीं देता, बल्कि पूरा जीवन बदलने की प्रक्रिया को दिशा देता है।

क्यों महत्वपूर्ण है सही प्रोस्थेटिस्ट?

  • सटीक क्लिनिकल असेसमेंट

  • मेडिकल, फंक्शनल और लाइफ-स्टाइल आधारित डिजाइन

  • चरणबद्ध फिटमेंट और गेट ट्रेनिंग

  • स्टम्प के बदलावों के अनुसार मॉडिफिकेशन

  • मानसिक अनुकूलन (Adaptation) में मार्गदर्शन

Foot Care Jaipur (Artificial Limb Clinic Since 1998) में
Dr. Rajiv Agrawal, Clinical Director (Prosthetics & Orthotics) के नेतृत्व में एक क्वालिफाइड, अनुभवी और मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम कार्य करती है, जो अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल्स के अनुसार patient-specific rehabilitation प्रदान करती है।
यही कारण है कि यहाँ रिहैबिलिटेशन सिर्फ फिटमेंट नहीं, बल्कि परफॉर्मेंस-ओरिएंटेड इंडिपेंडेंस पर केंद्रित होता है।


 प्रेरणादायक भारतीय उदाहरण

  • देवेंद्र झाझरिया – पैरालंपिक गोल्ड मेडलिस्ट, जिन्होंने अम्प्यूटेशन को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया

  • अरुणिमा सिन्हा – कृत्रिम पैर के साथ माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली पहली महिला

  • प्रेरणा और संकल्प की ये कहानियाँ बताती हैं:
    सीमाएँ शरीर में नहीं, सोच में होती हैं।


🚀 प्रोस्थेसिस को अपनाएँ, खुद को सीमित न करें

  • शुरुआती असहजता सामान्य है

  • सही ट्रेनिंग से हर मूवमेंट बेहतर होता है

  • धैर्य + अभ्यास = स्वतंत्रता

  • गलत आदतों से बचने के लिए प्रोफेशनल गाइडेंस अनिवार्य है


 निष्कर्ष

अम्प्यूटेशन जीवन का अंत नहीं, नए आत्मविश्वास की शुरुआत हो सकता है —
शर्त यह है कि:

  • मरीज मानसिक रूप से तैयार हो

  • परिवार सहयोगी बने

  • प्रोस्थेटिस्ट अनुभवी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाला हो

Foot Care Jaipur और Dr. Rajiv Agrawal का उद्देश्य है —
हर अम्प्यूटी को आत्मनिर्भर, सक्रिय और सम्मानजनक जीवन की ओर ले जाना।

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