Deep Vein Thrombosis (DVT) : Reasons, Symptoms, Treatment and Role of Custom Compression Stockings in managing the condition
डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT): कारण, लक्षण, उपचार और कस्टम कंप्रेशन स्टॉकिंग्स की वैज्ञानिक भूमिका
(एक ऑर्थोटिस्ट के दृष्टिकोण से)
डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) क्या है?
डीप वेन थ्रोम्बोसिस या DVT एक गंभीर स्थिति है, जिसमें शरीर की गहरी नसों (अधिकतर पैरों की नसों) में खून का थक्का (Blood Clot) बन जाता है। यदि समय पर उपचार न किया जाए, तो यह थक्का फेफड़ों तक पहुँचकर Pulmonary Embolism जैसी जानलेवा स्थिति पैदा कर सकता है।
DVT के सामान्य लक्षण (Symptoms of DVT)
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एक पैर में अचानक सूजन
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पिंडली या जांघ में दर्द या भारीपन
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त्वचा का लाल या नीला पड़ना
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प्रभावित हिस्से में गर्मी महसूस होना
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चलने या खड़े होने पर दर्द बढ़ना
कई बार DVT बिना लक्षण के भी हो सकता है, इसलिए जोखिम वाले मरीजों में सावधानी अत्यंत आवश्यक है।
DVT होने के मुख्य कारण (Causes of DVT)
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लंबे समय तक बैठे रहना या बिस्तर पर रहना
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सर्जरी या एक्सीडेंट के बाद मूवमेंट की कमी
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वैरिकोज़ वेन्स (Varicose Veins)
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मोटापा
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गर्भावस्था
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कैंसर या हार्मोनल दवाइयाँ
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बढ़ती उम्र
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लिंफोएडेमा (Lymphedema)
DVT के उपचार में कंप्रेशन थेरैपी का महत्व
DVT के उपचार में दवाओं के साथ-साथ कंप्रेशन थेरैपी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
यहीं से ऑर्थोटिस्ट की भूमिका शुरू होती है।
कंप्रेशन स्टॉकिंग्स कैसे काम करती हैं?
कंप्रेशन स्टॉकिंग्स पैरों पर नियंत्रित दबाव (Controlled Pressure) डालती हैं, जिससे:
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नसों में खून का प्रवाह ऊपर की ओर बेहतर होता है
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सूजन कम होती है
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थक्के बनने की संभावना घटती है
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दर्द और भारीपन में राहत मिलती है
प्रेशर ग्रेडिएंट (Pressure Gradient) – सबसे अहम बिंदु
Pressure Gradient का अर्थ है:
टखने (Ankle) पर सबसे अधिक दबाव और ऊपर की ओर जाते-जाते दबाव का क्रमशः कम होना।
यही वैज्ञानिक सिद्धांत नसों को खून को ऊपर दिल की ओर भेजने में मदद करता है।
कस्टम-मेड कंप्रेशन स्टॉकिंग्स क्यों ज़रूरी हैं?
एक अनुभवी ऑर्थोटिस्ट द्वारा बनाई गई Custom Compression Stockings में:
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मरीज के पैर का सटीक माप लिया जाता है
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रोग की गंभीरता के अनुसार सही कंप्रेशन क्लास चुनी जाती है
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सही Pressure Gradient सुनिश्चित किया जाता है
Foot Care Jaipur (Artificial Limb Clinic Since 1998) में प्रत्येक मरीज के लिए व्यक्तिगत मूल्यांकन के बाद ही स्टॉकिंग्स डिज़ाइन की जाती हैं।
रेडीमेड स्टॉकिंग्स से होने वाली समस्याएँ
बाजार में मिलने वाली रेडीमेड स्टॉकिंग्स में:
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सही प्रेशर ग्रेडिएंट नहीं होता
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कहीं ज़्यादा, कहीं कम दबाव पड़ता है
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टखने पर पर्याप्त कंप्रेशन नहीं मिल पाता
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जांघ पर अत्यधिक दबाव से खून का प्रवाह बाधित हो सकता है
संभावित दुष्प्रभाव:
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सूजन बढ़ना
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त्वचा में जलन या घाव
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DVT की स्थिति बिगड़ना
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लिंफोएडेमा में बढ़ोतरी
DVT मैनेजमेंट में एक्सरसाइज़ की भूमिका
कंप्रेशन स्टॉकिंग्स के साथ सही व्यायाम अत्यंत आवश्यक हैं:
आसान और सुरक्षित एक्सरसाइज़
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एंकल पंपिंग (Ankle Pumping)
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पैरों की उंगलियों को ऊपर-नीचे करना
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वॉकिंग (डॉक्टर की सलाह अनुसार)
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पिंडली की हल्की स्ट्रेचिंग
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बिस्तर पर रहते हुए पैरों को ऊपर उठाना
नियमित एक्सरसाइज़ + सही कंप्रेशन = बेहतर परिणाम
ऑर्थोटिस्ट की भूमिका और विशेषज्ञ मार्गदर्शन
DVT, Varicose Veins और Lymphedema जैसी स्थितियों में:
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केवल स्टॉकिंग पहनना पर्याप्त नहीं
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सही चयन, फिटिंग और फॉलो-अप अनिवार्य है
Dr. Rajiv Agrawal,
Clinical Director (Prosthetics & Orthotics)
Foot Care Jaipur (Artificial Limb Clinic Since 1998)
पिछले कई वर्षों से कंप्रेशन थेरैपी, ऑर्थोटिक मैनेजमेंट और मरीज-शिक्षा के माध्यम से हज़ारों मरीजों को सुरक्षित और बेहतर जीवन जीने में सहायता कर रहे हैं।
निष्कर्ष
DVT एक गंभीर लेकिन नियंत्रित की जा सकने वाली स्थिति है, बशर्ते:
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समय पर पहचान हो
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सही कंप्रेशन ग्रेडिएंट अपनाया जाए
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कस्टम-मेड स्टॉकिंग्स का उपयोग हो
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नियमित एक्सरसाइज़ और विशेषज्ञ मार्गदर्शन लिया जाए
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