हर चमकती चीज़ सोना नहीं होती: जानिए कस्टमाइज्ड इंसोल और रेडीमेड इन-सोल के बीच का सच - डॉ राजीव अग्रवाल, क्लिनिकल डायरेक्टर (प्रोस्थेटिक्स एवं ऑर्थोटिक्स) फुट केयर जयपुर (कृत्रिम अंग क्लीनिक 1998 से कार्यरत)
हर चमकती चीज़ सोना नहीं होती: जानिए कस्टमाइज्ड इंसोल और रेडीमेड इन-सोल के बीच का सच पुरानी कहावत है—“हर चमकती हुई चीज़ सोना नहीं होती।” आज के दौर में यह बात आपके पैरों की सेहत और इंसोल्स (Foot Insoles) के चयन पर बिल्कुल सटीक बैठती है। अक्सर जब लोगों को एड़ी, पंजे, घुटने या कमर में दर्द होता है, तो वे बाज़ार में मिलने वाले रंग-बिरंगे, चमकीले रेडीमेड जेल पैड्स या 30-40 मिनट में मशीन से तुरंत तैयार होने वाले 'फास्ट-फूड' स्टाइल इंसोल्स की तरफ आकर्षित हो जाते हैं। लेकिन एक क्लिनिकल प्रोस्थेटिस्ट और ऑर्थोटिस्ट के रूप में पिछले कई दशकों के अनुभव से मैं यह स्पष्ट कर दूं कि पैरों का बायोमैकेनिक्स इतना सरल नहीं होता कि उसे आधे घंटे के शॉर्टकट से ठीक किया जा सके। कस्टमाइज्ड इंसोल केवल पैडिंग नहीं, एक संपूर्ण मेडिकल साइंस है इंसान के पैर शरीर की पूरी नींव हैं। यदि नींव में हल्का सा भी असंतुलन हो, तो उसका असर एंकल, घुटने, हिप और रीढ़ की हड्डी तक जाता है। कस्टम इंसोल (Customized Insoles) केवल जूते के अंदर रखने वाला गद्दा नहीं है, बल्कि यह एक प्रिस्क्रिप्शन डिवाइस है जिसे बायोमैकेनिकल करेक्शन के ...