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Effective Musculoskeletal Rehabilitation with Custom Made Orthosis in patients of Cerebral Palsy

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  सेरेब्रल पाल्सी (Cerebral Palsy) मैं ऑर्थोटिक्स द्वारा प्रभावी पुनर्वास सेरेब्रल पाल्सी (CP) बच्चों में होने वाली एक न्यूरो-मस्कुलर स्थिति है, जिसमें मस्तिष्क के विकास के दौरान या जन्म के आसपास हुई क्षति के कारण चलने-फिरने, संतुलन, मांसपेशियों के नियंत्रण और दैनिक गतिविधियों (ADL) में कठिनाइयाँ आती हैं। हर CP बच्चा अलग होता है—इसलिए उपचार भी व्यक्तिगत (customized) होना चाहिए। सेरेब्रल पाल्सी के सामान्य लक्षण मांसपेशियों में जकड़न (Spasticity) या ढीलापन पैरों का अंदर/बाहर मुड़ना, पंजों के बल चलना संतुलन की कमी, बार-बार गिरना बैठने, खड़े होने व चलने में कठिनाई हाथ-पैरों की असमान गतिविधि समय के साथ जोड़ों में अकड़न व विकृति (Deformity) सेरेब्रल पाल्सी के कारण गर्भावस्था के दौरान मस्तिष्क विकास में बाधा समय से पहले जन्म (Prematurity) जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी जन्म के बाद संक्रमण या मस्तिष्क चोट समय पर उपचार न होने के दीर्घकालिक प्रभाव यदि CP बच्चे को समय रहते उचित ऑर्थोटिक हस्तक्षेप और प्रशिक्षण न मिले, तो: स्थायी विकृतियाँ (Fixed d...

Diabetic Foot - Neuropathy to Non Healing Ulcers and Amputation - Role of Orthotic Management

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  डायबिटिक फुट: सुन्नपन से न भरने वाले घाव तक — बचाव, नियंत्रण और सही ऑर्थोटिक उपचार की भूमिका डायबिटीज़ केवल ब्लड शुगर की बीमारी नहीं है—यह पैरों पर धीरे-धीरे, लेकिन गहरा असर डालती है। डायबिटिक न्यूरोपैथी से शुरू होकर न भरने वाले अल्सर तक का सफ़र अक्सर चुपचाप तय होता है। इस लेख में हम डायबिटिक फुट के विभिन्न चरणों, उनकी जनसांख्यिकी (डेमोग्राफी), नियंत्रण के उपाय, चलने-फिरने की आवश्यकता, और सही तरीके से डिज़ाइन व फिट किए गए ऑर्थोटिक्स की निर्णायक भूमिका को सरल भाषा में समझेंगे। यह मार्गदर्शन Foot Care Jaipur में अपनाई जाने वाली प्रमाणित प्रक्रियाओं और Dr Rajiv Agrawal , Clinical Director (Prosthetics & Orthotics) के अनुभव पर आधारित है। डायबिटिक फुट की डेमोग्राफी (किसे ज़्यादा जोखिम?) 40+ आयु वर्ग, लंबे समय से डायबिटीज़ अनियंत्रित HbA1c, धूम्रपान मोटापा, लंबे समय तक खड़े रहने/चलने की नौकरी पहले से कॉलस/डिफॉर्मिटी, संवेदना (सेन्सेशन) में कमी डायबिटिक फुट के चरण (Stages)  प्रारंभिक डायबिटिक न्यूरोपैथी लक्षण: सुन्नपन, झनझनाहट, जलन; दर्द कम महसूस होना ...

कृत्रिम अंग को लेकर आम मिथक और गलतियाँ – Prosthetist की Prescriptive सलाह

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कृत्रिम अंग को लेकर आम मिथक और गलतियाँ – Prosthetist की Prescriptive सलाह  अम्प्यूटेशन के बाद मरीज और उसके परिवार के मन में कई शंकाएँ और भ्रांतियाँ होती हैं। सही समय पर सही मार्गदर्शन न मिलने से कुछ ऐसी गलतियाँ हो जाती हैं, जो आगे चलकर चलने-फिरने, आत्मविश्वास और जीवन-गुणवत्ता (Quality of Life) को प्रभावित करती हैं। नीचे सबसे आम मिथकों के साथ उनका वैज्ञानिक और व्यावहारिक स्पष्टीकरण दिया गया है। मिथक 1: “सभी Prosthesis एक जैसे होते हैं” सच्चाई: हर मरीज की शारीरिक स्थिति, स्टम्प का आकार, ताकत, उम्र और गतिविधि-स्तर अलग होता है। इसलिए कस्टम-प्रिस्क्रिप्शन अनिवार्य है। गलत चयन से दर्द, असंतुलन और गलत चाल विकसित हो सकती है। मिथक 2: “Prosthesis लगते ही मरीज सामान्य चलने लगेगा” सच्चाई: Prosthesis के साथ Gait Training, वजन ट्रांसफर, संतुलन अभ्यास जरूरी हैं। बिना ट्रेनिंग के गलत चाल (Wrong Gait Pattern) बन जाती है, जिसे बाद में सुधारना कठिन होता है। मिथक 3: “शुरुआती दर्द या असहजता का मतलब Prosthesis बेकार है” सच्चाई: शुरुआती एडजस्टमेंट फेज़ में हल्की असहजता सामान्य हो सकती है, लेकिन लगात...

प्रोस्थेसिस के साथ जीवन की नई शुरुआत: शुरुआती गेट ट्रेनिंग और सही मार्गदर्शन का महत्व

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प्रोस्थेसिस के साथ जीवन की नई शुरुआत: शुरुआती गेट ट्रेनिंग क्यों है निर्णायक अम्प्यूटेशन के बाद प्रोस्थेसिस पहनना केवल एक उपकरण को अपनाना नहीं है, बल्कि शरीर, दिमाग और आत्मविश्वास—तीनों को नए तरीके से प्रशिक्षित करना है।  एक अनुभवी प्रोस्थेटिस्ट के दृष्टिकोण से यह समझना बहुत ज़रूरी है कि शुरुआती गेट ट्रेनिंग सही न हो तो आगे चलकर समस्याएँ बढ़ सकती हैं। अगर शुरुआती गेट ट्रेनिंग न हो तो क्या हो सकता है? कई बार मरीज बिना उचित मार्गदर्शन के चलना शुरू कर देते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि वे: गलत चाल (Wrong Gait Pattern) अपना लेते हैं प्रोस्थेटिक साइड पर वज़न कम और दूसरी साइड पर ज़्यादा डालते हैं लंगड़ाकर चलने की आदत विकसित कर लेते हैं सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एक बार गलत गेट पैटर्न बन गया, तो बाद में उसे सुधारना कठिन हो जाता है । इसमें ज़्यादा समय, मेहनत और कभी-कभी अतिरिक्त दर्द भी सहना पड़ सकता है। इसलिए शुरुआत से ही सही ट्रेनिंग गेम चेंजर साबित होती है। शुरुआती गेट ट्रेनिंग का वास्तविक महत्व सही गेट ट्रेनिंग से मरीज सीखता है: प्रोस्थेसिस पर सही तरीके से...