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Life after Amputation - Key Things to Manage things effectively and get better results - by Foot Care Jaipur (Artificial Limb Clinic Since 1998)

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मैं डॉ. राजीव अग्रवाल हूँ। Foot Care Jaipur (Artificial Limb Clinic Since 1998) में क्लिनिकल डायरेक्टर (Prosthetics & Orthotics) के रूप में, पिछले 28 वर्षों में मैंने हज़ारों ऐसे योद्धा मरीजों को देखा है जिन्होंने अपनी शारीरिक क्षमता को खोने के बाद फिर से खड़े होने का साहस जुटाया है। आज का यह लेख किसी तकनीक या प्रोस्थेटिक्स के बारे में नहीं, बल्कि उस 'मन' के बारे में है जो अंग विच्छेदन (Amputation) के ठीक बाद एक अंधेरी सुरंग में खड़ा होता है। शरीर का एक हिस्सा खोना, मन की एक लड़ाई की शुरुआत है Amputation सिर्फ एक सर्जिकल प्रक्रिया नहीं है; यह व्यक्ति की पहचान पर एक गहरी चोट है। सर्जरी के तुरंत बाद जब मरीज अपनी पट्टी (Bandage) की ओर देखता है, तो उसके मन में सबसे पहला ख्याल 'अधूरेपन' का आता है। 1. नकारात्मकता और भविष्य की चिंता अस्पताल के बिस्तर पर लेटे हुए मरीज के दिमाग में कई सवाल घूमते हैं:  * "क्या मैं फिर कभी अपने पैरों पर चल पाऊँगा?"  * "क्या समाज मुझे स्वीकार करेगा?"  * "क्या मैं अपने परिवार पर बोझ बन जाऊँगा?" यह दौर गहरा शोक (Grief),...

कैल्केनियक्टॉमी के बाद पुनर्वास में ऑर्थोटिक्स की भूमिका -By Foot Care Jaipur (Artificial Limb Clinic Since 1998)

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  कैल्केनियक्टॉमी के बाद पुनर्वास में ऑर्थोटिक्स की भूमिका लेखक: डॉ. राजीव अग्रवाल Clinical Director (Prosthetics & Orthotics) Foot Care Jaipur – Artificial Limb Clinic Since 1998 प्रस्तावना एड़ी (Heel) हमारे शरीर के चलने-फिरने की पूरी प्रक्रिया (Gait Pattern) का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। जब किसी कारणवश एड़ी की हड्डी यानी कैल्केनियम (Calcaneus) को आंशिक या पूर्ण रूप से निकालना पड़ता है, जिसे चिकित्सा भाषा में Calcaneoctomy / Calcanectomy कहा जाता है, तब मरीज के लिए सामान्य तरीके से चलना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसी स्थिति में ऑर्थोटिक्स (Orthotics) और विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए कस्टम फुट ऑर्थोसिस, AFO (Ankle Foot Orthosis),  मरीज को फिर से संतुलित और प्राकृतिक चाल (Natural Gait) की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पिछले 28+ वर्षों से Foot Care Jaipur (Artificial Limb Clinic Since 1998) में हम ऐसे कई मरीजों का सफल पुनर्वास कर चुके हैं जिनकी Calcaneoctomy Surgery हुई है। इस लेख में हम समझेंगे: Calcaneoctomy क्या होती है इसके प्रकार और स्...

मस्क्युलोस्केलेटल समस्याओं के बायोमैकेनिकल उपचार में ऑर्थोटिस्ट की भूमिका - by Foot Care Jaipur (Artificial Limb Clinic Since 1998)

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मस्क्युलोस्केलेटल समस्याओं के बायोमैकेनिकल उपचार में ऑर्थोटिस्ट की भूमिका — डॉ. राजीव अग्रवाल Clinical Director (Prosthetics & Orthotics) Foot Care Jaipur (Artificial Limb Clinic Since 1998) आज के समय में Flat Foot, Cavus Foot, Bunion, Heel Pain, Ankle Valgus/Varus, Knee Pain, Hip Pain, Back Pain, Cervical Spondylosis जैसी समस्याएँ केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं हैं। बच्चे, युवा, खिलाड़ी, ऑफिस में लंबे समय तक बैठने वाले लोग—सभी इन तकलीफों से जूझ रहे हैं। अक्सर लोग दर्द की गोली, फिजियोथेरेपी या सर्जरी को ही अंतिम विकल्प मान लेते हैं। लेकिन बहुत से मामलों में समस्या की जड़ बायोमैकेनिकल असंतुलन (Biomechanical Imbalance) होती है — और यहीं से शुरू होती है एक प्रशिक्षित ऑर्थोटिस्ट (Orthotist) की महत्वपूर्ण भूमिका। बायोमैकेनिक्स क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है? सरल शब्दों में कहें तो, हमारा शरीर एक चेन (chain) की तरह काम करता है — पैर से लेकर घुटना, कूल्हा, कमर और गर्दन तक। यदि पैर का आर्च (Arch) गिरा हुआ है (Flat Foot) या बहुत ऊँचा है (Cavus Foot), तो उसका असर ऊपर तक जाता है — घुटनों, कू...

अम्प्यूटी के लिए सुरक्षित, आरामदायक और आत्मविश्वास से भरा कदम - By Foot Care Jaipur (Artificial Limb Clinic Since 1998)

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शटल लॉक सिस्टम: बी.के. अम्प्यूटी के लिए सुरक्षित, आरामदायक और आत्मविश्वास से भरा कदम डॉ. राजीव अग्रवाल Clinical Director (Prosthetics & Orthotics) Foot Care Jaipur (Artificial Limb Clinic Since 1998) शटल लॉक क्या है? (Shuttle Lock System in Below Knee Prosthesis) जब भी कोई व्यक्ति below knee prosthesis (कृत्रिम पैर) का उपयोग शुरू करता है, तो सबसे बड़ा प्रश्न होता है – “क्या यह सुरक्षित रहेगा? क्या यह आरामदायक होगा? क्या मैं सामान्य चल पाऊँगा?” इन सभी सवालों का एक आधुनिक और विश्वसनीय समाधान है – Shuttle Lock Suspension System । शटल लॉक एक pin-based suspension system है, जिसमें सिलिकॉन लाइनर के नीचे एक पिन लगा होता है। यह पिन सॉकेट के अंदर लगे लॉक मैकेनिज़्म में फिक्स हो जाता है, जिससे कृत्रिम पैर मजबूती से अपनी जगह पर स्थिर रहता है।  सिलिकॉन लाइनर बनाम पारंपरिक PIDILINE लाइनर ✔ सिलिकॉन लाइनर के फायदे (Silicone Liner Advantages) बेहतर कुशनिंग और शॉक एब्जॉर्प्शन त्वचा के साथ कोमल संपर्क कम घर्षण  बेहतर फिटिंग और सस्पेंशन ❌ पारंपरिक PIDILINE लाइनर की सीमाएँ कम कुशनिंग ज्यादा...

प्रेरणा की उड़ान – “नज़र लक्ष्य पर हो, तो व्हीलचेयर भी बाधा नहीं बनती” : अवनि लेखरा की प्रेरक कहानी - By Foot Care Jaipur (Artificial Limb Clinic Since 1998)

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प्रेरणा की उड़ान – “नज़र लक्ष्य पर हो, तो व्हीलचेयर भी बाधा नहीं बनती” : अवनि लेखरा की प्रेरक कहानी ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------ डॉ. राजीव अग्रवाल Clinical Director (Prosthetics & Orthotics) Foot Care Jaipur (Artificial Limb Clinic Since 1998) ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------ आज मैं इस कहानी की शुरुआत किसी हादसे या पदक से नहीं , बल्कि एक शांत एकाग्रता से करना चाहता हूँ— वह एकाग्रता, जिसमें पूरा संसार थम जाता है और सिर्फ लक्ष्य बचता है। उसी एकाग्रता का नाम है -  Avani Lekhara एक दुर्घटना जिसने दिशा बदल दी अवनि एक सामान्य, सक्रिय किशोरी थीं। 2012 में एक सड़क दुर्घटना ने उनकी ज़िंदगी को अचानक रोक दिया। रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट व्हीलचेयर पर निर्भरता ऐसे क्षणों में मरीजों के परिवारजन अक्सर पूछते हैं — “डॉक्टर साहब, क्या अब सब सीमित हो गया?” -  अवनि की कहानी इस सवाल का सीधा जवाब ...

प्रेरणा की उड़ान – “हार को हराने की आदत” : प्रमोद भगत की अदम्य कहानी - by Foot Care Jaipur (Artificial Limb Clinic Since 1998)

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  प्रेरणा की उड़ान – “हार को हराने की आदत” : प्रमोद भगत की अदम्य कहानी -------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- डॉ. राजीव अग्रवाल Clinical Director (Prosthetics & Orthotics) Foot Care Jaipur (Artificial Limb Clinic Since 1998) --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- इस बार कहानी की शुरुआत किसी हादसे से नहीं, एक आदत से करना चाहता हूँ— हार को हराने की आदत। क्योंकि कुछ लोग गिरकर खड़े नहीं होते, वे खड़े रहकर गिरने से इंकार कर देते हैं। ऐसे ही इंसान हैं Pramod Bhagat  बचपन से ही अलग रास्ता प्रमोद भगत को बचपन में पोलियो हुआ। परिणाम—  एक पैर में स्थायी कमजोरी  चाल में असंतुलन  और समाज की वही पुरानी लाइन— “यह नहीं हो पाएगा” लेकिन प्रमोद ने कभी खुद से यह नहीं पूछा कि “मेरे साथ ऐसा क्यों?” उन्होंने पूछा— “मैं अब क्या बेहतर कर सकता हूँ?” यहीं से असली खेल शुरू होता है।  मानसिक मजबूती: रोज़ की ट्रेनिंग...