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Sesamoiditis - Reasons, Symptoms, Treatment and Role of Custom Orthotics in getting rid of Pain

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  सेसामोइडाइटिस (Sesamoiditis): कारण, लक्षण,  उपचार और कस्टम ऑर्थोटिक्स की निर्णायक  भूमिका (एक ऑर्थोटिस्ट के दृष्टिकोण से) सेसामोइडाइटिस क्या है? सेसामोइडाइटिस (Sesamoiditis) पैर के अंगूठे (Big Toe) के नीचे स्थित सेसामोइड हड्डियों में होने वाली सूजन और दर्द की स्थिति है। ये छोटी-छोटी हड्डियाँ टेंडन के भीतर होती हैं और चलने, दौड़ने तथा वजन उठाने के दौरान शॉक एब्जॉर्प्शन और लीवर मैकेनिज़्म में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। सेसामोइडाइटिस के सामान्य लक्षण अंगूठे के नीचे धीरे-धीरे बढ़ने वाला दर्द चलने या खड़े होने पर दर्द का बढ़ना कठोर ज़मीन पर चलने में असहजता अंगूठे को मोड़ने में दर्द कभी-कभी सूजन या जलन 👉 कई मरीज इसे साधारण दर्द समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जिससे समस्या क्रॉनिक हो सकती है। सेसामोइडाइटिस होने के प्रमुख कारण लंबे समय तक गलत फुटवेयर का उपयोग हाई आर्च या फ्लैट फुट जैसी बायोमैकेनिकल गड़बड़ियाँ ज़्यादा चलना, दौड़ना या सीढ़ियाँ चढ़ना उम्र बढ़ने के साथ फोरफुट पर प्रेशर का असंतुलन डायबिटीज या नसों से जुड़ी समस्याएँ प...

Deep Vein Thrombosis (DVT) : Reasons, Symptoms, Treatment and Role of Custom Compression Stockings in managing the condition

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  डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT): कारण, लक्षण, उपचार और कस्टम कंप्रेशन स्टॉकिंग्स की वैज्ञानिक भूमिका (एक ऑर्थोटिस्ट के दृष्टिकोण से) डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) क्या है? डीप वेन थ्रोम्बोसिस या DVT एक गंभीर स्थिति है, जिसमें शरीर की गहरी नसों (अधिकतर पैरों की नसों) में खून का थक्का (Blood Clot) बन जाता है। यदि समय पर उपचार न किया जाए, तो यह थक्का फेफड़ों तक पहुँचकर Pulmonary Embolism जैसी जानलेवा स्थिति पैदा कर सकता है। DVT के सामान्य लक्षण (Symptoms of DVT) एक पैर में अचानक सूजन पिंडली या जांघ में दर्द या भारीपन त्वचा का लाल या नीला पड़ना प्रभावित हिस्से में गर्मी महसूस होना चलने या खड़े होने पर दर्द बढ़ना  कई बार DVT बिना लक्षण के भी हो सकता है, इसलिए जोखिम वाले मरीजों में सावधानी अत्यंत आवश्यक है। DVT होने के मुख्य कारण (Causes of DVT) लंबे समय तक बैठे रहना या बिस्तर पर रहना सर्जरी या एक्सीडेंट के बाद मूवमेंट की कमी वैरिकोज़ वेन्स (Varicose Veins) मोटापा गर्भावस्था कैंसर या हार्मोनल दवाइयाँ बढ़ती उम्र लिंफोएडेमा (Lymphedema) DV...

Role of Orthotics / Orthotist in treatment of Stroke Patients

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स्ट्रोक रोगियों में  ऑर्थोटिक्स की भूमिका   स्ट्रोक (Brain Stroke) के बाद रोगी के शरीर में चलने-फिरने, संतुलन, मांसपेशियों की ताकत और समन्वय से जुड़ी कई समस्याएँ उत्पन्न हो जाती हैं। एक ऑर्थोटिस्ट के रूप में मेरा अनुभव बताता है कि सही समय पर, सही ऑर्थोटिक प्रिस्क्रिप्शन और उसका प्रोटोकॉल के अनुसार उपयोग रोगी को दोबारा आत्मनिर्भर बनाने में निर्णायक भूमिका निभाता है। Dr Rajiv Agrawal , Clinical Director (Prosthetics & Orthotics) Foot Care Jaipur (Artificial Limb Clinic Since 1998) बताते हैं की, पिछले कई वर्षों से स्ट्रोक रोगियों के साथ काम करते हुए यह स्पष्ट देख रहा हूँ कि ऑर्थोटिक्स केवल “सपोर्ट” नहीं, बल्कि री-लर्निंग ऑफ मूवमेंट का एक वैज्ञानिक माध्यम है। स्ट्रोक के बाद होने वाली पाल्सी (Palsy) – नामकरण व समझ स्ट्रोक के प्रकार और मस्तिष्क के प्रभावित भाग के अनुसार अलग-अलग पाल्सी देखी जाती हैं: हेमीप्लीजिया (Hemiplegia) शरीर के एक ही तरफ (दायाँ या बायाँ) हाथ-पैर प्रभावित सबसे आम स्ट्रोक-संबंधित स्थिति समस्याएँ: फुट ड्रॉप घुटने का अस्थिर होना हा...