पुरानी एड़ी का दर्द (Chronic Heel Pain): केवल दर्द नहीं, शरीर के संतुलन का संकेत भी हो सकता है : डॉ. राजीव अग्रवाल, Clinical Director (Prosthetics & Orthotics) Foot Care Jaipur (Artificial Limb Clinic Since 1998)







 

पुरानी एड़ी का दर्द (Chronic Heel Pain): केवल दर्द नहीं, शरीर के संतुलन का संकेत भी हो सकता है

लेखक: डॉ. राजीव अग्रवाल

Clinical Director (Prosthetics & Orthotics)
Foot Care Jaipur (Artificial Limb Clinic Since 1998)

"डॉक्टर साहब, सुबह बिस्तर से पैर नीचे रखते ही ऐसा लगता है जैसे एड़ी में कोई कील चुभ गई हो..."

पिछले लगभग तीन दशकों में मैंने हजारों ऐसे मरीज देखे हैं जो इसी शिकायत के साथ हमारे क्लिनिक आए। अधिकांश लोगों की कहानी लगभग एक जैसी होती है। शुरुआत में हल्का दर्द होता है। फिर वे दर्द की दवा लेते हैं, गर्म पानी से सिकाई करते हैं, इंटरनेट पर घरेलू नुस्खे ढूंढते हैं, या बाज़ार से कोई भी सॉफ्ट इनसोल खरीद लेते हैं। कुछ दिनों के लिए राहत मिलती है, लेकिन कुछ समय बाद दर्द पहले से अधिक बढ़कर वापस आ जाता है।

यदि आपकी एड़ी का दर्द तीन महीने या उससे अधिक समय से बना हुआ है, तो यह केवल एक सामान्य दर्द नहीं, बल्कि आपके शरीर के बायोमैकेनिक्स (चलने और वजन संतुलन की प्रणाली) में किसी गड़बड़ी का संकेत हो सकता है।


पुरानी एड़ी के दर्द के सामान्य कारण

एड़ी का दर्द कई कारणों से हो सकता है। सही कारण की पहचान किए बिना उपचार करना अक्सर अधूरा साबित होता है।

1. प्लांटर फेशियाइटिस (Plantar Fasciitis)

सबसे सामान्य कारण। एड़ी के नीचे मौजूद मजबूत लिगामेंट (Plantar Fascia) में बार-बार तनाव आने से सूजन और दर्द उत्पन्न होता है।

2. हील स्पर (Heel Spur)

कई लोग एक्स-रे में दिखने वाली हड्डी की वृद्धि (स्पर) को ही दर्द का कारण मान लेते हैं। वास्तव में अनेक लोगों में Heel Spur होता है लेकिन दर्द नहीं होता। असली समस्या अक्सर आसपास के टिश्यू पर लगातार पड़ने वाला तनाव होता है।

3. फ्लैट फुट (Flat Foot)

जब पैर का प्राकृतिक आर्च कम हो जाता है तो पूरा वजन एड़ी और तलवे पर असमान रूप से पड़ता है।

4. हाई आर्च (High Arch Foot)

कुछ लोगों के पैरों में आर्च अत्यधिक ऊँचा होता है। इससे शरीर का भार कुछ सीमित बिंदुओं पर केन्द्रित हो जाता है, जिससे एड़ी पर अत्यधिक दबाव पड़ता है।

5. अधिक वजन (Obesity)

शरीर के अतिरिक्त वजन का सबसे पहला प्रभाव पैरों और एड़ी पर पड़ता है।

6. लंबे समय तक खड़े रहना

शिक्षक, फैक्ट्री कर्मचारी, पुलिसकर्मी, नर्स, दुकानदार और कई अन्य पेशों में लंबे समय तक खड़े रहने से एड़ी पर लगातार दबाव पड़ता है।

7. गलत फुटवियर

कठोर सोल, घिसे हुए जूते या बिना सपोर्ट वाली चप्पलें दर्द को लगातार बढ़ा सकती हैं।

8. मधुमेह (Diabetes), गठिया (Arthritis) तथा अन्य चिकित्सीय कारण

कुछ मरीजों में एड़ी का दर्द केवल पैरों की समस्या नहीं बल्कि किसी बड़ी बीमारी का संकेत भी हो सकता है।


लोग घर पर कौन-कौन से उपाय करते हैं?

लगभग हर मरीज पहले घरेलू उपायों से राहत पाने की कोशिश करता है।

आमतौर पर लोग—

  • गर्म पानी से सिकाई करते हैं।

  • बर्फ से सेक करते हैं।

  • दर्द निवारक दवाइयाँ लेते हैं।

  • दर्द कम करने वाली जैल लगाते हैं।

  • इंटरनेट देखकर स्ट्रेचिंग करते हैं।

  • सिलिकॉन हील पैड खरीद लेते हैं।

  • मुलायम चप्पल पहन लेते हैं।

  • तेल से मालिश करते हैं।

  • आयुर्वेदिक या हर्बल उपचार अपनाते हैं।

इनमें से कई उपाय शुरुआती अवस्था में कुछ समय के लिए आराम दे सकते हैं, लेकिन यदि दर्द का मूल कारण पैरों की संरचना (Foot Mechanics) या गलत वजन वितरण है, तो केवल इन उपायों से स्थायी समाधान मिलना कठिन होता है।


केवल दर्द दबाने के क्या नुकसान हो सकते हैं?

यही वह गलती है जो मैं अपने क्लिनिक में सबसे अधिक देखता हूँ।

जब दर्द बना रहता है, तो व्यक्ति अनजाने में चलने का तरीका बदल देता है। शरीर दर्द से बचने के लिए स्वयं को समायोजित करता है।

धीरे-धीरे इसका प्रभाव केवल एड़ी तक सीमित नहीं रहता।

समय के साथ—

  • चाल (Gait) असंतुलित हो जाती है।

  • घुटनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

  • कूल्हों में दर्द शुरू हो सकता है।

  • कमर दर्द विकसित हो सकता है।

  • दूसरी एड़ी में भी दर्द शुरू हो सकता है।

  • टखने में अस्थिरता बढ़ सकती है।

  • मांसपेशियों में असंतुलन विकसित हो सकता है।

  • रोजमर्रा की गतिविधियाँ प्रभावित होने लगती हैं।

  • व्यायाम और चलना कम होने से वजन और बढ़ सकता है।

  • जीवन की गुणवत्ता धीरे-धीरे कम होने लगती है।

कई बार मरीज वर्षों तक केवल दर्द की दवाइयाँ लेते रहते हैं। इससे पेट, किडनी या अन्य अंगों पर भी दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं यदि दवाओं का लंबे समय तक बिना चिकित्सकीय सलाह के उपयोग किया जाए।


ऑर्थोटिस्ट की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?

यहीं पर एक प्रशिक्षित एवं अनुभवी ओर्थोटिस्ट (Orthotist) की भूमिका शुरू होती है।

ओर्थोटिस्ट का कार्य यह समझना होता है कि—

  • आपका पैर कैसे काम करता है।

  • चलते समय वजन कहाँ पड़ रहा है।

  • कौन-सी मांसपेशियाँ अधिक तनाव में हैं।

  • शरीर का संतुलन कैसे बिगड़ रहा है।

  • दर्द की वास्तविक बायोमैकेनिकल वजह क्या है।

इसके बाद मरीज के लिए व्यक्तिगत (Custom) Orthotic Prescription तैयार किया जाता है।


कस्टम ऑर्थोटिक क्यों बेहतर होता है?

हर व्यक्ति के पैर अलग होते हैं।

फिर एक ही तरह का तैयार बना ऑर्थोसिस सभी के लिए कैसे सही हो सकता है?

Custom Orthosis तैयार करते समय कई बातों का ध्यान रखा जाता है—

  • Foot Alignment

  • Arch Height Index

  • Weight Distribution

  • Heel Position

  • Walking Pattern

  • Occupation

  • Body Weight

  • Activity Level

इन्हीं जानकारियों के आधार पर ऐसा Orthotics बनाया जाता है जो केवल दर्द कम करने के लिए नहीं बल्कि उसके कारण को नियंत्रित करने के लिए बनाया जाता है।


क्या केवल सिलिकॉन हील पैड पर्याप्त है?

यह प्रश्न मुझसे बहुत पूछा जाता है।

उत्तर है—

हर मरीज के लिए नहीं।

कुछ लोगों को अस्थायी आराम मिल सकता है, लेकिन यदि पैर की संरचना ही गलत है, तो केवल हील पैड पर्याप्त समाधान नहीं होता।


Foot Pressure Analysis क्यों आवश्यक हो सकती है?

आज आधुनिक तकनीक से हम चलते समय पैरों पर पड़ने वाले दबाव का विश्लेषण कर सकते हैं।

इससे यह समझने में सहायता मिलती है कि—

  • किस भाग पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा है।

  • वजन कैसे वितरित हो रहा है।

  • चाल में कहाँ असंतुलन है।

  • किस प्रकार का Orthotic सबसे उपयुक्त रहेगा।

यही वैज्ञानिक मूल्यांकन उपचार को अधिक सटीक बनाता है।


कब Orthotist डॉक्टर से अवश्य मिलना चाहिए?

यदि—

  • दर्द तीन सप्ताह से अधिक बना रहे,

  • सुबह उठते समय दर्द अत्यधिक हो,

  • चलने में कठिनाई होने लगे,

  • सूजन या लगातार बढ़ता दर्द हो,

  • बार-बार दर्द वापस आ रहा हो,

  • मधुमेह के साथ एड़ी में दर्द हो,

तो स्वयं उपचार करते रहने के बजाय विशेषज्ञ से मूल्यांकन कराना उचित होता है।


मेरा अनुभव

लगभग तीन दशकों के अनुभव में मैंने यह सीखा है कि एड़ी का दर्द केवल एक लक्षण है। वास्तविक समस्या अक्सर पैरों की कार्यप्रणाली, शरीर के संतुलन और वजन वितरण में छिपी होती है।

जब हम केवल दर्द को दबाने के बजाय उसके कारण को समझकर उपचार करते हैं, तभी लंबे समय तक आराम मिलने की संभावना बढ़ती है।

यदि समय रहते सही मूल्यांकन, उचित फुटवियर, आवश्यक व्यायाम और वैज्ञानिक रूप से डिज़ाइन किए गए कस्टम ऑर्थोटिक का उपयोग किया जाए, तो अनेक मरीज बिना अनावश्यक दवाओं या अन्य आक्रामक उपचारों के अपनी दैनिक गतिविधियों में बेहतर सुधार अनुभव कर सकते हैं।


निष्कर्ष

एड़ी का पुराना दर्द कोई ऐसी समस्या नहीं है जिसे वर्षों तक सहते रहना चाहिए।

दर्द शरीर का एक संदेश है कि कहीं न कहीं संतुलन बिगड़ रहा है।

यदि इस संकेत को समय पर समझ लिया जाए, तो न केवल एड़ी बल्कि घुटनों, कूल्हों और कमर को भी भविष्य की कई समस्याओं से बचाया जा सकता है।

अपने पैरों का ध्यान रखिए, क्योंकि यही आपके पूरे शरीर की नींव हैं।


डॉ. राजीव अग्रवाल
Clinical Director (Prosthetics & Orthotics)
Foot Care Jaipur (Artificial Limb Clinic Since 1998)

"सही मूल्यांकन, वैज्ञानिक उपचार और व्यक्तिगत ऑर्थोटिक समाधान—यही दीर्घकालिक राहत की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम हैं।"










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