एक अम्प्यूटी का जीवन: निर्भरता से आत्मनिर्भरता तक – एक प्रोस्थेटिस्ट का दृष्टिकोण - by Foot Care Jaipur (Artificial Limb Clinic Since 1998)







 एक अम्प्यूटी का जीवन: निर्भरता से आत्मनिर्भरता तक – एक प्रोस्थेटिस्ट का दृष्टिकोण

लेखक: Dr Rajiv Agrawal, Prosthetist & Orthotist
Clinical Director (Prosthetics & Orthotics), 

Foot Care Jaipur (Artificial Limb Clinic Since 1998)

अम्प्यूटेशन (अंग विच्छेदन) किसी भी व्यक्ति के जीवन में शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक, सामाजिक और व्यावसायिक स्तर पर भी एक बड़ा बदलाव लेकर आता है। लेकिन यह बदलाव अंत नहीं, बल्कि सही मार्गदर्शन और वैज्ञानिक प्रोस्थेटिक रिहैबिलिटेशन के साथ एक नई, आत्मनिर्भर शुरुआत बन सकता है। एक प्रोस्थेटिस्ट के रूप में मेरा अनुभव स्पष्ट रूप से बताता है कि अम्प्यूटी का जीवन कितना सफल, स्वतंत्र और कार्यक्षम होगा—यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि रिहैबिलिटेशन की प्रक्रिया कितनी सही, व्यवस्थित और प्रोफेशनल तरीके से अपनाई गई है।


अम्प्यूटी का जीवन सफल क्या बनाता है?

1️⃣ योग्य और अनुभवी प्रोस्थेटिस्ट की देखरेख

प्रोस्थेटिक रिहैबिलिटेशन कोई रेडीमेड समाधान नहीं है।
Qualified & Experienced Prosthetist द्वारा तय किए गए स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल, सही टाइमिंग और चरणबद्ध प्रक्रिया अम्प्यूटी को:

  • आत्मनिर्भर बनाती है

  • कार्यक्षमता (Work Capability) बढ़ाती है

  • दर्द, घाव और जटिलताओं से बचाती है

गलत मार्गदर्शन या अधूरी जानकारी व्यक्ति को लंबे समय तक निर्भर, निराश और शारीरिक रूप से कमजोर बना सकती है।


2️⃣ सही प्रोस्थेटिक मूल्यांकन (Prosthetic Evaluation)

हर अम्प्यूटी अलग होता है।
इसलिए प्रोस्थेटिक मूल्यांकन में शामिल होना चाहिए:

  • स्टम्प की स्थिति और हीलिंग

  • शरीर का संतुलन और ताकत

  • पेशा, जीवनशैली और लक्ष्य

  • मानसिक स्वीकार्यता और मोटिवेशन

बिना सही मूल्यांकन के लगाया गया कृत्रिम अंग अक्सर दर्दनाक, असहज और अनुपयोगी साबित होता है।


3️⃣ Right Prosthetic Prescription – सबसे अधिक अनदेखा किया गया पहलू

आज सबसे बड़ी समस्या यह है कि मरीज गलत या अधूरी Prosthetic Prescription के आधार पर प्रोस्थेसिस चुन लेते हैं।
सही प्रिस्क्रिप्शन तय करता है:

  • किस प्रकार का कृत्रिम अंग उपयुक्त है

  • कौन-सा टेक्नोलॉजी लेवल आवश्यक है

  • भविष्य में अपग्रेड और प्रगति की संभावना

गलत प्रिस्क्रिप्शन = असफल रिहैबिलिटेशन।


4️⃣ सटीक निर्माण और फिटमेंट (Fabrication & Fitment)

प्रोस्थेसिस की सफलता केवल डिज़ाइन से नहीं, बल्कि:

  • सटीक निर्माण (Precision Fabrication)

  • परफेक्ट फिटमेंट

  • Qualified Team की निगरानी

पर निर्भर करती है।
गलत फिटमेंट से:

  • दर्द

  • घाव

  • असंतुलन

  • चलने में डर

जैसी समस्याएं जन्म लेती हैं।


5️⃣ फिटमेंट के बाद ट्रेनिंग और ट्रांजिशन

प्रोस्थेसिस लगाना अंतिम कदम नहीं है—यह तो शुरुआत है।
Post-fitment Training में शामिल होना चाहिए:

  • सही चलने की ट्रेनिंग

  • वजन संतुलन

  • दैनिक गतिविधियों (ADL) का अभ्यास

  • कार्यस्थल के अनुसार अनुकूलन

यह चरण यदि ठीक से न हो, तो बेहतरीन प्रोस्थेसिस भी बेकार हो जाता है।


6️⃣ मानसिक और शारीरिक अनुकूलन (Acclimatisation)

अम्प्यूटी को नए शरीर और नई परिस्थिति को:

  • मानसिक रूप से स्वीकार करना

  • शारीरिक रूप से अपनाना

सीखना पड़ता है।
यह प्रक्रिया प्रोस्थेटिस्ट और क्लिनिक की मनोवैज्ञानिक गाइडेंस के बिना अधूरी रहती है।


7️⃣ परिवार का सहयोग – अदृश्य लेकिन सबसे मजबूत आधार

परिवार का सकारात्मक समर्थन:

  • आत्मविश्वास बढ़ाता है

  • निराशा कम करता है

  • निरंतर अभ्यास के लिए प्रेरित करता है

जहां परिवार साथ होता है, वहां परिणाम हमेशा बेहतर होते हैं।


जब रिहैबिलिटेशन गलत दिशा में जाता है…

  • बिना प्रोटोकॉल के इलाज

  • गैर-योग्य व्यक्तियों द्वारा फिटमेंट

  • मानसिक गाइडेंस की कमी

  • जल्दबाज़ी या गलत सलाह

ये सभी कारण अम्प्यूटी के जीवन को कठिन, दर्दनाक और निर्भर बना देते हैं।


निष्कर्ष

पिछले कई वर्षों में हमने सैकड़ों ऐसे उदाहरण देखे हैं, जहाँ सही प्रोटोकॉल, योग्य प्रोस्थेटिस्ट, प्रशिक्षित टीम और परिवार के सहयोग ने अम्प्यूटी को न केवल चलना सिखाया, बल्कि काम करने, आत्मसम्मान से जीने और समाज में सक्रिय भूमिका निभाने में सक्षम बनाया।

प्रोस्थेटिक रिहैबिलिटेशन कोई उत्पाद नहीं, बल्कि एक प्रक्रिया है।
और जब यह प्रक्रिया सही हाथों में होती है—तो परिणाम वास्तव में चमत्कारी होते हैं।


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